Poem on Periods | आज फिर महीना आया है By Paakhi

Poem on Periods | आज फिर महीना आया है By Paakhi 

अलग था, अलग लिए बिस्तर, अलग सबसे बिठा-या है…..2X

मां ने आज उसको सबको बीमार बताया है।।

मंदिर में भी जाना उसका कुछ दिन निषेध करवाया है।  

सुनो सुनो सुनो…. 2X

आज फिर महीना आया है।।  …. 2X

बिलखते देखा बेटी को,

बिलखते देखा बेटी को, तो बाबा ने सवाल उठाया है।।

मां ने नजरें झुका के पेट में दर्द बताया है।।

भाई भी आ गया बोला दवाई लाया है…2X

मां ने गुस्से में कहा,…..2X

आखिर हमने भी सहा, तुमने क्यों तमाशा बनाया है!…2X

कर लो ढोंग…2X

दवाई मत खाना शांत रहो अच्छा नहीं लगता ।

आज फिर एक मां ने अपनी बेटी को दर्द सहना सिखाया है।।

सुनो सुनो सुनो आज फिर महीना आया है।।

पूजा क्यों नहीं की तुमने?

आज इस कमरे में क्यों हो?

पेट में दर्द क्यों है? 

अरे आज पढ़ने क्यों नहीं गई?

न जाने और कितने सवालों का मैंने और मां ने मिलकर बोझ उठाया है

मेरी चुप्पी पर मां के बहाने बनाना… 2X

और मेरा शर्म से सर झुक जाना

ऐसी ही कई जिल्लतो ने मुझे आज यहां पहुंचा है।

सुनो सुनो सुनो आज फिर महीना है।।…2X

जीवन मिलता जिस प्रक्रिया से उसे ही मेरी शर्म बना डाला ।

और लोगों ने तो दर्द सहना जैसे मेरा धर्म बना डाला।।

मां ने सिखाया था बचपन में कि कभी चोट से खून निकले तो बताना आकर,

यहां चोट तो नहीं लगी पर हर महीने खून निकलने पर मुझे अशुद्ध कहकर मेरे दिल पर कभी न भरने वाला जख्म बना डाला।।

और कुछ लोग होंगे अब भी विहाया, बेशर्म कह के नवाजएंगे मुझे, शुक्रिया आपका क्योंकि मैंने तो तुम्हारा ढकोसला का दुपट्टा हटा डाला। 

अब नहीं रख सकते मुझे चुप और तुम,

क्योंकि मैंने तो इस घुटन का किस्सा ही मिटा डाला।।…2X

और लोगों ने तो दर्द सहना जैसे मेरा धर्म बना डाला।।

वो क्या है ना हमारी आदत थोड़ी पुरानी है दर्शाने की थोड़ा वक्त तो लेगी जाने में ।

हाथ दर्द में हूं क्योंकि Periods आए हैं,

अभी मुश्किल तो होगी बताने में,

अभी झिझक तो होगी बताने में,

तुम काम बस इतना करना,

सवाल कम पूछना मदद करना दर्द निभाने में,

अगर हम-उम्र हो तो पूछ लेना जाकर,

वरना साथ देना राज छुपाने में।

आदत पुरानी है ना तो थोड़ा वक्त तो लगेगी जाने में,

कोशिश बस मेरी इतनी है कि वह दोबारा दर्द ना झेले पहल, पीरियड का और दूसरे उसे छिपाने में,

करो शुरुआत तुम घर से ही इस घूटन को मिटाने में,

शायद तुम्हारी कोशिश नया बदलाव ले आए जवानी में,

हां मैं दर्द में हूं, क्योंकि Periods आए है फिर हमें शर्म ना आए बताने में।।…2X

Poem on Periods in Hindi | By Paakhi

Poem on Periods by Paakhi