तू खुद की खोज में निकल Poem By Amitabh Bachchan For Inspiration

Tu Khud Ki Khoj Me Nikal in Hindi

तू खुद की खोज में निकल,
तू किस लिए हताश है? ..2X,
तू चल तेरे वजूद की,
समय को भी तलाश है। ….2X

जो तुझ से लिपटी बेड़ियाँ,
समझ न इन को वस्त्र तू ….2 X
ये बेड़ियां पिघाल के ,
बना ले इनको शस्त्र तू। ….. 2X

तू खुद की खोज में निकल,
तू किस लिए हताश है? ..2X,
तू चल तेरे वजूद की,
समय को भी तलाश है। ….2X

चरित्र जब पवित्र है
तो क्यों है ये दशा तेरी ? ……2X
ये पापियों को हक़ नहीं ।
कि ले ये परीक्षा तेरी। ….. 2X

तू खुद की खोज में निकल,
तू किस लिए हताश है? ..2X,
तू चल तेरे वजूद की,
समय को भी तलाश है।। ….2X

जला के भस्म कर उसे।
जो क्रूरता का जाल है ।।……2x
तू आरती की लौ नहीं।
तू क्रोध की मशाल है।। ….2X

तू खुद की खोज में निकल,
तू किस लिए हताश है? … 2X
तू चल तेरे वजूद की,
समय को भी तलाश है। ….2X

चूनर उड़ा के ध्वज बना,
गगन भी कपकाएगा ….. 2X
अगर तेरी चूनर गिरी,
तोह एक भूकंप आएगा। ….. 2X

तू खुद की खोज में निकल,
तू किस लिए हताश है? ….. 2X
तू चल तेरे वजूद की,
समय को भी तलाश है। ….2X

लेखक – तनवीर ग़ाज़ी

Tu Khud Ki Khoj Mein Nikal In English By Amitabh Bachchan

Tum mujhko kab tak rokoge

Tum Mujhko Kab Tak RokogeBy :- Amitabh BacchanLike👇👇https://www.facebook.com/1amodsinghaniyaतुम मुझको कब तक रोकोगे मुठ्ठी में कुछ सपने लेकर, भरकर जेबों में आशाएं ।दिल में है अरमान यही, कुछ कर जाएं… कुछ कर जाएं… । ।सूरज-सा तेज़ नहीं मुझमें, दीपक-सा जलता देखोगे ।सूरज-सा तेज़ नहीं मुझमें, दीपक-सा जलता देखोगे…अपनी हद रौशन करने से, तुम मुझको कब तक रोकोगे…तुम मुझको कब तक रोकोगे… । ।मैं उस माटी का वृक्ष नहीं जिसको नदियों ने सींचा है…मैं उस माटी का वृक्ष नहीं जिसको नदियों ने सींचा है …बंजर माटी में पलकर मैंने…मृत्यु से जीवन खींचा है… ।मैं पत्थर पर लिखी इबारत हूँ… मैं पत्थर पर लिखी इबारत हूँ ..शीशे से कब तक तोड़ोगे..मिटने वाला मैं नाम नहीं… तुम मुझको कब तक रोकोगे… तुम मुझको कब तक रोकोगे…।।इस जग में जितने ज़ुल्म नहीं, उतने सहने की ताकत है…इस जग में जितने ज़ुल्म नहीं, उतने सहने की ताकत है ….तानों के भी शोर में रहकर सच कहने की आदत है । ।मैं सागर से भी गहरा हूँ.. मैं सागर से भी गहरा हूँ…तुम कितने कंकड़ फेंकोगे ।चुन-चुन कर आगे बढूँगा मैं… तुम मुझको कब तक रोकोगे…तुम मुझको कब तक रोकोगे..।।झुक-झुककर सीधा खड़ा हुआ, अब फिर झुकने का शौक नहीं..झुक-झुककर सीधा खड़ा हुआ, अब फिर झुकने का शौक नहीं..अपने ही हाथों रचा स्वयं.. तुमसे मिटने का खौफ़ नहीं…तुम हालातों की भट्टी में… जब-जब भी मुझको झोंकोगे…तब तपकर सोना बनूंगा मैं… तुम मुझको कब तक रोकोगे…तुम मुझको कब तक रोक़ोगे…।।

Posted by Amod Singhaniya on Thursday, May 23, 2019

Tu khud ki khoj mein nikal,
Tu kis liye Hatas hai?… 2X
Tu chal Tere wajud ki,
Samay ko bhi talash hai. …….2X

Jo tujh se liti bediyan,
Samjh na in ko washtra tu… 2X
Ye Bediya pighal ke,
Bna le inko shatra tu,
Bna le inko shatra tu.

Tu khud ki khoj mein nikal,
Tu kis liye Hatas hai?… 2X
Tu chal Tere wajud ki,
Samay ko bhi talash hai. …….2X

Chritra jab Pavitra hai,
To kyun hai ye dasha teri? …2X
Ye Papiyon ko hak nhin,
Ki ye le priksha teri, …2X

Tu khud ki khoj mein nikal,
Tu kis liye Hatas hai?… 2X
Tu chal Tere wajud ki,
Samay ko bhi talash hai. …….2X

Jala kar bhashm kar use,
Jo krurta ka jaal hai……2X
Tu aarti ki law nhi,
Tu krodh ki mashal hai…..2X

Tu khud ki khoj mein nikal,
Tu kis liye Hatas hai?… 2X
Tu chal Tere wajud ki,
Samay ko bhi talash hai. …….2X

Chunner uda ke dhwaj bna,
Gagan bhi kampkampaayega….2X
Agar teri chunner giri,
Toh ek Bhukamp aayega….2X

Tu khud ki khoj mein nikal,
Tu kis liye Hatas hai? …… 2X
Tu chal Tere wajud ki,
Samay ko bhi talash hai. …….2X

Poetry : Tanveer Ghazi